मॉडर्न फिजिक्स ऑफ कौटिल्य के फूफा
इंसान निर्जीव नहीं, उनमें सोचने समझने का गुण होता है। इसीलिए कहा जाता है कि पदार्थों पर लागू क्लासिकल भौतिकी के नियम इंसानों पर लागू नहीं होते है। इसी समझ के चलते मानविकी विषयों में "फ्री विल" और लिबर्टी आदि संकल्पनाओं को इंसानों को समझने के लिए महत्वपूर्ण माना गया है। परंतु ये सब पाश्चात्य देशों और संस्कृतियों का ज्ञान है। भारत ज्ञान मीमांसा में सदा अग्रणी रहा है। हमारे गुमनाम महर्षियों ने एक गुप्त ज्ञान का सृजन किया है जिसमें भौतिकी के सिद्धांत भली भांति इंसानों पर लागू किए जा सकते है और फ्री विल और लिबर्टी जैसे विचार अनावश्यक या अप्रासंगिक है।
एक सरल सूत्र ये है कि जब भी आप ऐसी योजना देते है जिसमें उदाहरण के लिए कुल 20 लोगों में से दो को टॉफी प्राप्त होती है और दो के पिछवाड़े पे कील चुभाई जाती है तो प्राकृतिक रूप से दो खुश होते है और दो रोते है परंतु बाकी 16 लोगो के व्यवहार में बड़ा शानदार प्रभाव देखने को मिलता है। ये 16 लोग एक रहस्यम चुप्पी साध लेते है और ये लोग अपने २ व्यक्तित्व के अनुसार कील से बचने या टॉफी प्राप्त करने की जुगत में लग जाते है। अतः दुख और सुख के ये कृत्रिम केंद्र लगभग मैग्नेटिक फील्ड की तरह पूरे समाज को प्रभावित करते है और इनमें फ्री विल का लोप नहीं होता परंतु फ्री विल की माता "बुद्धि" इन 16 लोगों को बताती है कि बुद्धिमानी कील से बचने और टॉफी प्राप्त करने की जुगत में ही निहित है। अतः व्यक्ति अपनी फ्री विल को साथ में लिए इस मैग्नेटिक फील्ड के अनुसार कार्य करने लगता है, और इस प्रकार इंसानों के व्यवहार को समझने में फ्री विल एक काम का इडिया नहीं रहता।
इस आधुनिक फिजिक्स के सूत्र का प्रभाव अक्सर छोटी संस्थाओं और सरकारी तंत्र में बड़ी स्पष्टता से दिखता है।
अगर आप इस सूत्र का प्रयोग करना चाहते हैं मतलब फूफा बनना चाहते है तो आपको कई चीजों का ध्यान रखना होगा।
मतलब जैसे
टॉफी आदि का लाभार्थी कुछ समय अंतराल के बाद बदला जाना चाहिए, क्योंकि उसकी खुशी की अभिव्यक्ति घट जाती है और वो सुख के केंद्र की प्रभावशीलता को घटाता है। ऐसा ही सब दुख के केंद्र के बारे में भी सही है। वैसे सुख दुख के केंद्रों की स्थापना के बाद ये सब ऑटोमैटिक सा हो जाता है। मतलब 16 में से कुछ लोग सत्ता या फूफाजी की इतनी भगती करते है और अपने आप को टॉफी के लिए सक्षम प्रस्तुत करते है कि पुरानो को हटा नए सुपात्र को लाना बड़ा आसान होता है। इसी प्रकार दुख के केंद्र पर स्थित लोग जी जान लगा दुख केंद्र से हटने की कोशिश करते हैं।
दूसरा महत्वपूर्ण तत्व आपका (फूफा का) सत्ता के साथ चिपकना होता है क्योंकि बिना सत्ता से जुड़ाव या तालमेल के ये सारी योजना कार्यशील ही नहीं हो सकती है। वैसे तो पूरा शास्त्र है इस सत्ता से जुड़ाव पर, परंतु इस लेख के लिए प्रासंगिक बात बस इतनी सी है कि ऐसी कार्य योजनाएं सत्ता या मालिक के लिए बड़े मनोवैज्ञानिक सुख की होती है। ऐसी योजनाएं सुव्यवस्था का भान देती है और नियंत्रण का तीव्र और मजेदार आभास पैदा करती हैं। अतः फूफा अक्सर अपरिहार्य होते है सत्ता या मालिक के लिए। अच्छे फूफा के लिए ये बहुत जरूरी है कि उनके पास सुख और दुख केंद्र जनित करने की कई योजनाएं हो। अगर ऐसे गुणवान कोई हो तो वे बड़ा शानदार एवं प्रभावशाली जीवन जीते है।
हमारी ज्ञान परंपरा लिखित नहीं है, अतः उन्हें किसी फूफा के सानिध्य में ही बेहतर आत्मसात किया जा सकता है । इसलिए अगर फूफा शिप के गुरु सीखने हो तो किसी स्थापित फूफा के श्री चरणों से लिपट जाइए और डेरा डाल दीजिए। हर संस्था में एक या दो स्थापित फूफाजी मिल ही जाते है।
ये आधुनिक भौतिकी या मॉडर्न फिजिक्स एक बड़ा क्षेत्र है और इसमें ऐसा ही बहुत सारा रहस्यमय ज्ञान छिपा है।
लेखक एक नालायक व्यक्ति है जिसने ऑब्जर्वेशन विधि से इस रहस्यमई ज्ञान को चुराने या रहस्यहीन बनाने का प्रयास किया है। सच्चा ज्ञान तो फूफाजी के श्री चरणों में ही प्राप्त हो सकता है।
सादर।
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